Top
Home > पुलिस > नक्सलबाड़ी- बारूद और साहित्य की जुगलबंदी से उभरी एक कथा बैरिकेड।

नक्सलबाड़ी- बारूद और साहित्य की जुगलबंदी से उभरी एक कथा 'बैरिकेड'।

नक्सलबाड़ी- बारूद और साहित्य की जुगलबंदी से उभरी एक कथा बैरिकेड।
X

0 युवाओं को फोकस करती एक कहानी लिखी डाली है एक पुलिस अफसर ने।

ताहिर खान

बीजापुर। छत्तीसगढ़ में बस्तर के घने जंगलों में नक्सल अतिवादियों के सफाए के लिए तैनात भोपालपटनम एसडीओपी अभिषेक सिंह ने युवाओं को फोकस और प्रेरित करती एक कथा बैरिकेड लिख डाली है और ये जल्द ही मार्केट में आ जाएगी। इस कथा में प्रेम, धोखा, हिंसा, सिविल सेवा के लिए युवाओं को प्रेरणा, यारी, लड़ाई आदि शुमार हैं।

पुलिस और साहित्य का मेल नहीं होता ऐसा अमूमन माना जाता है। एसडीओपी अभिषेक सिंह इसमें अपवाद हैं। नक्सली हिंसा के बीच दिमागी स्ट्रेस और अनुभवों से भरी कथा गढ़ना आम काम नहीं है। तकरीबन 125 पन्नों की ये कहानी उनके अनुभवों का निचोड़ है। 199 रूपए की कीमत की इस किताब की अब तक 1200 लोगों ने प्री बुकिंग करवा दी है। वे बताते हैं कि इस किताब की खासियत ये है कि जो भी युवा इस कथा को पढ़ेगा, वो युवा इसमें खुद को नायक समझने लगेगा। सिविल सर्विैसेस की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए ये बहुत ही अच्छी किताब है क्योंकि ये प्रेरणा से भरी है। 2013 बैच के एसडीओपी अभिषेक बताते हैं कि इस पुस्तक में अन्ना हजारे के आंदोलन के प्रथम चरण का अंश भी शुमार किया गया है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से प्राचीन इतिहास में एमए एसडीओपी कहते हैं कि इस कथा में उनका ही नहीं बल्कि और भी लोगों के अनुभवों का समावेष है। जशपुर, गौरेला-पेण्ड्रा और कोटा में सेवा देने के बाद इसी साल अप्रैल में उनकी पोस्टिंग भोपालपटनम पुलिस अनुभाग में हुई। उन्होंने बिलासपुर में रहते ये पुस्तक लिखनी शुरू की और भोपालपटनम में ये पूरी हुई। इसमें करीब छह माह लग गए। ये पुस्तक छपने की प्रक्रिया में है। इसका प्रकाशन नई दिल्ली की फर्म ग्लोरिओसा सुपर्बा कर रही है। अमेजाॅन और फ्लिपकार्ट में भी ये ऑनलाइन जल्द आ जाएगी।

म्यांऊ का ठौर

बस्तर का भोपालपटनम अनुभाग नक्सलियों का एक बड़ा आधार इलाका है। घने जंगल और भाषागत दिक्कत यहां ज्यादा है। एक ओर तो माओवादी हमेशा पुलिस पर हमले की फिराक में रहते हैं और दूसरी ओर गोण्डी बोली बाहरी अफसरों की समझ से बाहर है। सड़कों का जाल अब तक नहीं बिछ पाया है और पुलिस भी सड़क निर्माण में सुरक्षा में लगी रहती है। ऐसे में इस अनुभाग में एसडीओपी पर ही सारी कमान रहती है, चाहे वो ऑपरेशन का या फिर सुरक्षा का। इस बीच लेखन वाकई काबिले तारीफ है।

Updated : 22 Nov 2020 11:34 AM GMT
Tags:    
Next Story
Share it
Top