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BIG BREAKING- आदिवासी झामसिंह की हत्या मामले में हुआ बड़ा खुलासा, छत्तीसगढ़ की सीमा में घुसकर मध्यप्रदेश की पुलिस ने मारी थी गोली,बाद में उठाकर ले गये शव!

BIG BREAKING- आदिवासी झामसिंह की हत्या मामले में हुआ बड़ा खुलासा, छत्तीसगढ़ की सीमा में घुसकर मध्यप्रदेश की पुलिस ने मारी थी गोली,बाद में उठाकर ले गये शव!
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0 माराडबरा जंगल के भोमटोक बीट क्रमांक 158 में मारी गई गोली,स्थल पर खून के धब्बे मौजूद!

0 घटनास्थल पर मिले खून के धब्बे व शव को घसीटने के निशान, सर्व आदिवासी दल ने स्वयं कि मामले की इन्वेस्टिगेशन।

0 सर्वदलीय आदिवासी संगठन ने लगाए मध्य प्रदेश पुलिस पर गंभीर आरोप। आदिवासियों को बेवजह नक्सली बताकर मारा जा रहा है, बटालियन के कैंप को किया जाना चाहिए बंद।

ताहिर खान
कवर्धा - झलमला थाना के अंतर्गत शीतलपानी के आश्रित ग्राम बालसमुंद निवासी राम सिंह धुर्वे की मौत मध्य प्रदेश पुलिस की गोली लगने से मौत हो गई थी। इस मौत को मध्य प्रदेश पुलिस जहां नक्सली मुठभेड़ के दौरान गोली लगने की बात बता रहे हैं वहीं दूसरी ओर आदिवासी संगठन मध्य प्रदेश पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बेकसूर आदिवासी की हत्या की गई है और वह भी छत्तीसगढ़ की सीमा में घुसकर झामसिंग को गोरी मारा गया है, उसकी लाश को उठाकर एमपी के बॉर्डर में ले जाकर फर्जी रूप से नक्सली दिखाने की साजिश किया जा रहा है। जबकि यह सीधे तौर पर एनकाउंटर का मामला है। इसमें दोषी लोगों पर हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए साथ ही पीड़ित परिवार को मुआवजा भी मिलना चाहिए।
इस खबर को CG संवाद ने प्रमुखता के साथ उठाते हुए हर पहलू पर खबर प्रकाशित की जिसके बाद प्रशासन से लेकर सरकार हरकत में आई अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे तो वही मंत्री व विधायक मोहम्मद अकबर के निर्देश के बाद प्रशासन भी आज पीड़ितों से मिलने के लिए पहुंचा।

सर्व आदिवासी संगठन का गढ़ी में बैठक

घटना से आक्रोशित आदिवासियों ने इस घटना की पुरजोर मुखर विरोध किया है इसी क्रम में मध्य प्रदेश के गढ़ी में शुक्रवार को सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया गया था, जिसमें वहां हुए घटना के बारे में स्थानीय लोगों से बात की गई जहां कई खुलासे हुए। गोंड़ आदिवासी समाज के प्रमुख प्रभाती मरकाम ने CG संवाद को बताया कि कि झामसिंह और नेम सिंह कभी भी नक्सली गतिविधियों में शामिल नहीं थे, वह सामान्य किसान थे और मछली मारने के लिए हमेशा की तरह छत्तीसगढ़ की सीमा में लगे नाले में गए हुए थे इस दौरान लगभग 20 मीटर दूरी से पुलिस ने गोली मार दी। इस बैठक में यह अभी प्रस्ताव पास हुआ है कि नक्सलियों के नाम पर बेकसूर आदिवासियों को हत्या बंद हो, आदिवासियों की प्रताड़ना बंद हो। आदिवासी इलाकों में कैंप लगाए गए हैं उसको को भी वहां से हटा देना चाहिए, क्योंकि अब आदिवासियों को बेवजह प्रताड़ित कर उनकी हत्या होने लगी है।

छत्तीसगढ़ के जंगलों में मारी गई गोली!

सर्वदलीय आदिवासी संगठन ने जब घटनास्थल में पहुंचकर जानकारी जुटाई तो वहां यह पाया गया कि झाम सिंह दौड़ते हुए छत्तीसगढ़ की सीमा में आ गए थे और मध्य प्रदेश की पुलिस ने उन्हें छत्तीसगढ़ की सीमा क्षेत्र में लगे माराडबरा के जंगल भोमटिकरा के कक्ष क्रमांक 158 में गोली मारी गई है, जहां पर खून के निशान भी देखे गए हैं, साथ ही जो मछली मारने की छड़ी झामसिंह हाथ में रखा था वह छड़ी भी वहीं पर खून से लथपथ पड़ी हुई थी। शव को घसीटने के भी निशान घटनास्थल पर देखे गए हैं।

हटना सथल पर मौजूद खून के निशान

पुलिस पर भी उठे सवाल

सर्वदलीय आदिवासी संगठन ने झलमला पुलिस पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं संगठन का कहना है कि पुलिस ने इस मामले को लेकर बेहद लापरवाही बरती घटनास्थल की जांच नहीं की गई। मामले को यह बता कर टालने की कोशिश गई की गई कि घटना मध्यप्रदेश का है ,जबकि सर्वदलीय संगठन जब जाकर घटनास्थल में देखा तो पता चला कि घटना छत्तीसगढ़ के सीमा के अंदर घटित हुई है इस लिहाज से झलमला थाना पुलिस को भी तत्परता दिखाते हुए अपना फर्ज अदा करना था जिसमें वे असफल साबित हुए।

पुलिस के लिए आदिवासियों का विश्वास जीतने की चुनौती

कम्युनिटी पुलिसिंग के दौरान कुछ सालों में आदिवासी क्षेत्र में कबीरधाम पुलिस में बेहद सकारात्मक काम किए और आदिवासियों का विश्वास जीतने में सफलता हासिल किया था, जिसके चलते नक्सली बैकफुट पर चले गए और गतिविधियां अभी जिले में नहीं के समान हैं, लेकिन अब एक आदिवासी को मारने का मामला सामने आया है जिसके बाद आदिवासी समाज पुलिस के रवैया से नाखुश हैं जल्द ही इन दरारों को नहीं भरा गया तो आने वाले समय में नक्सली मूवमेंट के लिए आदिवासियों को बिना विश्वास में लिए हुए आगे बढ़ना मुश्किल साबित हो सकता है। बहरहाल आदिवासियों के टूटे हुए विश्वास को फिर से जोड़ने की चुनौती पुलिस के सामने है।

शव को घसीटने के निशान

Updated : 12 Sep 2020 12:19 PM GMT
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