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छात्रों को डिप्रेशन से बचाने की कवायद, परीक्षा परिणाम आते ही फेल व पूरक आये विद्यार्थियों की काउंसलिंग शुरू।

छात्रों को डिप्रेशन से बचाने की कवायद, परीक्षा परिणाम आते ही फेल व पूरक आये विद्यार्थियों की काउंसलिंग शुरू।
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  • आत्महत्या व अवसाद रोकने के उद्देश्य से सीएमएचओ डॉ सुरेश कुमार तिवारी के निर्देशन व जिला मेंटल हेल्थ नोडल डॉ गौरव परिहार के मार्गदर्शन में टीम कर रही कार्य

ताहिर खान, कवर्धा- स्कूली बच्चों में परीक्षा परिणाम संतोषजनक न आने से अनेक मानसिक परेशानियों की शिकायतें सामने आती हैं। ऐसी स्थित में अवसाद व इसके चलते आत्महत्याओं की खबरे मिलती हैं। गत वर्ष पंडरिया की कक्षा 9वी की छात्रा परीक्षा परिणाम अपने आशा अनुरूप न आने के कारण कुएं में कूदकर जान दे दी थी। बच्चों में इस मनोदशा को रोकने के उद्देश्य से मुख्य चिकित्सा एवं स्वाथ्य अधिकारी ने जिला मानसिक स्वास्थ्य की टीम को ऐसे बच्चों की लिस्ट शिक्षा विभाग से लेकर उनकी काउंसलिंग करने का निर्देश दिया है। जिला मानसकि स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ गौरव सिंह परिहार ने इस सम्बंध में बताया कि टीम द्वारा उक्त निर्देश के परिपालन में कार्य आरम्भ कर दिया गया है। टीम को स्कूली छात्र-छत्राओं के साथ ही उस क्षेत्र के ऐसे अन्य किसी प्रकरण की जानकारी लेकर उनकी भी काउंसलिंग करने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि किसी प्रकार के हार्मोनल समस्या या अन्य लम्बी बीमारी वाले छात्र - छात्राओं की भी काउंसलिंग की जाएगी। अनेक मामलों में जागरूक परिजनों द्वारा जिला मेंटल हेल्थ सेंटर्स में सम्पर्क कर लिया जाता है,लेकिन बहुत से मामलों में ऐसा नही हो पाता है और कभी-कभी दुखद परिणाम भी सामने आ जाते हैं, इन्हें रोकने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति टीनएजर्स व उनके परिजनों में जागरूकता लाने के उद्देश्य से ही जिले भर में इस तरह की मुहिम आरम्भ की गई है।

मानसिक स्वास्थ्य सम्बन्धी परामर्श के लिए कर सकते हैं इन नम्बरों पर सम्पर्क

किसी भी प्रकार का मानसिक परेशानी होने पर परामर्श के लिए जिला चिकित्सालय अथवा जिला मानसिक स्वास्थ्य की टीम के लोगों से सम्पर्क किया जा सकता है।
डॉ गौरव सिंह परिहार( जिला नोडल अधिकारी राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम) - मोबाइल नम्बर - 8839082266
अनिल हियाल(नर्सिग अधिकारी)- 9981250248
तूलिका शर्मा(काउंसलर) - 9575900995
अखिलेश साहू( साइकेट्रिक सोशल वर्कर) - 9993225697
अराधना बंजारे(कम्युनिटी नर्स)- 9303849980

डिप्रेशन के लक्षण
मनोरोग चिकित्सकों की मानें, तो डिप्रेशन की बीमारी किसी को भी हो सकती है। कुछ ऐसे लक्षण भी हैं, जिनके बीच दौर में ही आप अपने बच्चे के दिमाग में पनप रहे डिप्रेशन को पहचान सकते हैं। जैसे-

  • आपका हंसता-खेलता बच्चा अचानक से गुमसुम सा बर्ताव करने लगे।
  • वो चिड़चिड़ा हो जाए या छोटी से छोटी बात पर उसे ग़ुस्सा आने लगे या वह अधिक मज़ाक करने लगे।
  • खेल-कूद से कभी न थकने वाले बच्चे बाहर जाकर दोस्तों के साथ खेलने से जी चुराने लगे।
  • जो बच्चा तन्हाई में एक पल न बिताता हो, उसे अचानक अकेले रहने का मन करने लगे।
  • दिन में काफ़ी समय टीवी के सामने बैठ अपने पसंदीदा कार्टून को देखने या वीडियो गेम को अपने से बहुत अधिक प्यार करनेवाला बच्चा अचानक से इन चीज़ों की तरफ़ भी न देखें।

*बच्चा बिना किसी ख़ास कारण के स्कूल जाने से बार-बार इनकार करने लगे और ज़बरदस्ती स्कूल भेजने पर कोई न कोई बीमारी का बहाना बना दे।

  • खाने-पीने में अरुचि या मन नहीं लगना।
  • भरपूर नींद न ले। छोटी उम्र में जब बच्चे 8 से 10 घंटे की नींद पूरी करते हैं, तो स्थिति सामान्य है ,लेकिन अचानक इसमें कमी आए तो बच्चे पर ध्यान देने की जरूरत है।
    ऐसी स्थिति में तत्काल उक्त नम्बरों पर सम्पर्क करें व उचित मार्गदर्शन लें।

Updated : 27 Jun 2020 1:20 PM GMT
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