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सरकार ने निभाया वादा, टोकन कट चुके किसानों के धान की होगी खरीदी। फैसले के बाद फस सकता है पेच!

सरकार ने निभाया वादा, टोकन कट चुके किसानों के धान की होगी खरीदी। फैसले के बाद फस सकता है पेच!
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घेराव के दौरान मौजूद किसान

ताहिर खान,प्रधान संपादक
कवर्धा -किसानों को भूपेश सरकार ने एक बड़ी सौगात फिर से दी है जिसमें 20 फरवरी तक धान खरीदी का टोकन कट चुके किसानों का धान सरकार 16 से 19 मार्च के बीच में खरीदेगी। इस आदेश का इंतजार किसानों को बेसब्री से था।
ज्ञात हो कि टोकन कट चुके किसानों के धान को खरीदने की मांग को लेकर किसानों ने कवर्धा में एक ऐतिहासिक आंदोलन किया था जिसमें 200 से अधिक घंटे तक लगातार कलेक्टर कार्यालय का घेराव, नेशनल हाईवे जाम और साथ ही शहर की ओर आने वाली सभी प्रमुख मार्गों को बंद कर दिया गया था। धान खरीदने की मांग पर अड़े रहे अंततः विधानसभा में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धान खरीदी की घोषणा कि तब कहीं जाकर आंदोलन खत्म हुआ। अब एक बार फिर सरकार बचे हुए कुछ किसानों का धान खरीदेगी बशर्ते 20 फरवरी तक टोकन कट चुका।

जो किसान एक भी बार धान नहीं बेचे हैं उनकी ही हो पाएगी खरीदी

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार सरकार ने यह फैसला लिया है कि सिर्फ उन्हीं किसानों का धान खरीदा जाएगा जो 20 फरवरी तक टोकन कटने के बाद भी एक दाना धान खरीदी केंद्र में भेजा नहीं है उन किसानों का धान नहीं लिया जाएगा जो एक या दो किस्त में अपनी धान पहले ही भेज चुके हैं।हालांकि अभी यह स्पष्ट नही हो पाया है।

जिले में 13000 किसानों का धान खरीदना बांकी

एक आंकड़े के मुताबिक ज़िला कबीरधाम के 86 धान ख़रीदी केंद्रों में 13034 किसान ऐसे हैं जिनको टोकन जारी किया गया है परंतु उनका 508162 क्विंटल धान ख़रीदा नहीं गया है।
वही सूत्रों पर विश्वास करें तो इनमें से आधे किसानों के ही धान की खरीदी सरकार कर पाएगी जो पहली बार धान बेचेंगे।

लगभग 1 महीने से सोसायटी के बाहर ट्रैक्टरों में पड़ा हुआ है किसानों का धान
किसानों का 20 फरवरी तक धान खरीदने के लिए टोकन काटा गया था लेकिन बारदाना की जबरदस्त कमी के चलते खरीदी नहीं हो पाई थी। किसान अपने धान लेकर ट्रैक्टरों में सोसाइटी तक पहुंचे हुए थे और सरकार के द्वारा खरीदी की आस लगाकर ट्रैक्टर ट्राली में धान को वहीं छोड़ दिया गया है जो अब तक धान खरीदी केंद्र के बाहर देखा जा सकता है। सालिहां,राजानवागांव ना जाने ऐसे कितने धान खरीदी केंद्र है जहां आधे किसानों का ही धान को खरीदा जा चुका है और आधे अभी बाकी है यदि सूत्रों के मुताबिक जो खबर सामने आ रही है कि पहली बार धान बेचने वाले किसानों का ही ध्यान सरकार खरीदेगी तो वैसे में 60 से 70% किसान यूं ही इस खरीदी से बाहर हो जाएंगे क्योंकि यह वे किसान है जो एक या दो बार किस्तों में धान सरकार को सोसाइटी के माध्यम से बेच चुके हैं और लगभग लोग बोनस को छोड़कर उसकी कीमत भी पा चुके हैं।

किसान संघ के रुख पर नजर

ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सरकार ने एक बार फिर पेच फंसा दिया है अब देखना यह होगा कि यदि सरकार यह आदेश जारी करती है कि सिर्फ टोकन कट चुके किसान वह भी जो पहली बार बेचेंगे उन्ही किसानों का धान खरीदा जाएगा। यदि ऐसा होगा तो किसान संघ का रुख क्या होगा क्या वे आंदोलन के लिए चले जाएंगे या इस फैसले का समर्थन करेंगे। आपको बता दे कि प्रदर्शन में शामिल रहे किसानों के ऊपर कई अलग-अलग धाराओं के तहत मामला पहले भी दर्ज हो चुका है। तो क्या ऐसे में किसान धारा 144 लगने के बाद कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर पाएंगे। बहरहाल यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा फिलहाल सरकार ने किसानों को एक बार फिर राहत देने की कोशिश की है।

Updated : 14 March 2020 6:38 PM GMT
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