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73 साल बाद भी नहीं बदल सकी बोइरकछरा की तक़दीर, मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसता जिला मुख्यालय से कुछ ही दूर एक गांव।

73 साल बाद भी नहीं बदल सकी बोइरकछरा की तक़दीर, मूलभूत सुविधाओं के लिए तरसता जिला मुख्यालय से कुछ ही दूर एक गांव।
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0 सुविधाओं की मांग को लेकर ट्रैक्टर में सवार होकर पहुंची महिलाएं।

ताहिर खान

कवर्धा-जिले में ना जाने आजादी के 73 साल बाद भी कितने गांव ऐसे भी हैं जहां तक पहुंच मार्ग, पुल आवाजाही की व्यववस्था स्वास्थ्य चिकित्सा व्यवस्था शिक्षा साधनों की कमी बनी हुई है । ऐसा ही एक गांव है बोइरकछरा, जहां की 50 से अधिक महिलाएं सुविधा की मांग को लेकर गुहार लगाने ट्रेक्टर में सवार होकर कवर्धा जिला कार्यालय पहुंची। ग्राम बोईरकछरा के ग्रामीण फोंक नदी में बने रपटा में कमर से ऊपर तक बह रहे पानी को जान जोखिम में डालकर पार कर रहे हैं . एक गांव से दूसरे गांव जाने के लिए ग्रामीणों को या तो ट्रेक्टर का सहारा लेना पड़ता है या फिर नाव बनाकर इस रपटा को पार करते हैं. इस दौरान काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है . इस परेशानी को अनेक बार उनके द्वारा जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है बावजूद इसके कोई सुनवाई नहीं हो रही है. परेशान ग्रामीण इस रपटे पर पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं ताकि आवाजाही में किसी प्रकार की दिक्कत ना हो.

जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर ग्राम बोईरकछरा जो बोड़ला विकासाखंड में आता है यहां के ग्रामीण विगत कई वर्षों से फोंक नदी में बने रपटे पर पुल निर्माण कार्य होने की बांट जोह रहे हैं लेकिन अब तक इस दिशा में कोई कार्य नहीं हुआ है. इन दिनों छीरपानी जलाशय से उलट चल रहा है जिसके कारण रपटा में कमर से ऊपर तक पानी भरा हुआ है. ऐसे में इस रपटे को पार करना जोखिम भरा सफर है. बच्चों से लेकर युवाओं, बुजुर्गों व महिलाओं को इस स्थान से दूसरे स्थान तक जाने में काफी परेशानी हो रही है . आवश्यक कार्य होने पर नाव बना लेते हें या फिर ट्रेक्टर, जीप से इसे पार कर जाते हैं.

ग्रामीण हो चुके हैं चोटिल

ग्राम बोईरकछरा में बना रपटा ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनने लगा है. यहां पानी भरे होने के कारण इस रपटा को पर करना जोखिम भरा रहता है लेकिन कई लोगों में आवश्यक कार्य होने के कारण इसे पार करने के दौरान चोटिल भी हो चुके हैं. इसके बाद से ग्रामीण ट्रेक्टर का सहारा लेकर इसे पार कर दूसरे किनारे में जाते हैं तब कही जाकर बोड़ला मुख्यालय पहुंचते हैं. क्योंकि तहसील व अन्य शासकीय कार्यालय यहां संचालित होने से अपने कार्य में लेकर ग्रामीण जाते हैं.

गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने में होती है परेशानी

मंगलवार को कलेक्टर पहुंची ग्राम बोईकछरा की ग्रामीण दुवसिया चंद्रवंशी , प्यारी चंद्रवंशी, पुसैया निषाद , नीलम नेताम, , सुनीता नेताम, कविता, कुसुम , शिवबती मेरावी, गीता , अंजनी धुर्वे, नैनबती निषाद, सीता ने कहा कि रपटा के ऊपर से पानी बहने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को बोड़ला अस्पताल ले जाने में होती है क्योंकि आवाजाही का एकमात्र रास्ता यही है. मजबूरी में खाट में लेकर कंधे के सहारे इसे पार करना पड़ता है. गत सप्ताह गर्भवती सीमा पति सुखदेव , आशा पति शिवगभगत धुर्वे को इसी रपटे से बड़ी मुश्किल से पार कराकर बोड़ला अस्पताल पहुंचाया गया तथा तेज गति से बह रहे पानी को पार करना काफी कष्टदायक होता है.

बरसात में होती है मुश्किल

ग्रामीण महिलाओं ने बताया कि बरसात के चार महीने तक इस रपटा को पार कर जाना काफी मुश्किल रहता है. जब पानी कम होता है तभी इसे पार कर जाते हैं . वर्तमान में छीरपानी जलाशय से उलट चल रहा है जिसके कारण 24 घंटे कमर से ऊपर तक पानी भरा रहता है. ऐसे में मोटर सायकल चालकों को आवाजाही में दिक्कत होती है मजबूरी में चार से छ: लोग मोटर सायकल को कंधे में लेकर दूसरे किनारे तक ले जाते हैं जिसके बदले में चालक को 40 से 50 रुपए अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है.

पुल बनाने व सड़क से जोड़ने की मांग

मंगलवार को ग्राम बोईरकछरा से लगभग 50 महिलाएं ट्रेक्टर से कलेक्ट्रेट कार्यालय जिला प्रशासन से मिलने पहुंची थी. उन्होंने बताया कि गांव में बना रपटा अब उपयोग के लायक नहीं रह गया है. यहां बरसात के समय पानी भरे होने से आवाजाही नहीं हो पाती. ऐसे में इस जगह पर पुल का निर्माण किया जाए .साथ ही सड़क से भी जोड़ा जाए ताकि लोगों का आवाजाही सुगम हो सके . इस स्थान से ग्राम कुसमघटा , अचानकपुर, गड़ई, कुरमुंदा, नेउरगांव सहित अन्य गांव के लोगों की आवाजाही रहती है . ऐसे में प्रशासन को अवगत कराकर यहां पुल व सड़क बनाने की मांग की गई है.





Updated : 2020-10-22T00:52:20+05:30
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