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26 बैगा परिवार 4 साल से सरकारी दफ्तरो का लगा रहे है फेरे,अब तक नही मिला मुआवजा।

26 बैगा परिवार 4 साल से सरकारी दफ्तरो का लगा रहे है फेरे,अब तक नही मिला मुआवजा।
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0 पूर्व सरकार के द्वारा थंवरझोल के आदिवासियोंं की जमीन का सड़क बनाने किया गया था अधिग्रहण।

ताहिर खान/राकेश यादव

कवर्धा- विकासखंड अंतर्गत वनांचल ग्राम थंवरझोल में वनविभाग के द्वारा सड़क का निर्माण करने के लिए यहां वर्षों से निवासरत बैगा आदिवासियों की जमीन को अधिग्रहित कर लिया तथा इसके बदले में प्रत्येक परिवार को 10 लाख रुपए का मुआवजा राशि देने का आश्वासन दिया गया था लेकिन चार वर्ष बीत जाने के बाद भी आज पर्यंत तक उक्त प्रभावित 26 परिवार के लोगों को यह राशि नहीं मिल पाई है और वे दर -दर भटक रहे हैं. ग्राम थंवरझोल भोरमदेव अभ्यारण्य क्षेत्र में आता है जहां वर्षों से बैगा आदिवासी परिवार यहां निवासरत होकर अपने परिवार का भरण पोषण करते थे, लेकिन वर्ष 2017 में वन विभाग के द्वारा उक्त आदिवासियों को यह कहकर खदेड़ दिया गया कि यहां पर रोड का निर्माण किया जाएगा और उक्त जमीन की जरूरत पड़ेगी. जब वनांचल वासियों ने इसका पुरजोर विरोध किया तो जमीन के बदले मुआवजा राशि देने का आश्वासन दिया गया। जिसमें प्रत्येक परिवार को 10 लाख रुपए भुगतान करना था. आदिवासी परिवार विभाग की बातों में आकर थंवरझोल को छोड़ दिए और ग्राम बीजाढाब में रहने लगे और यहीं परिवार के साथ रहकर रोजी मजदूरी करते हुए जीवकोपार्जन चला रहे हैं. वनांचलवासी गुल्ठा बैगा, थान सिंह बैगा ने बताया कि वन विभाग के द्वारा जब गांव से सभी को हटवाए थे तब कहा गया था कि मुआवजा राशि जल्द ही दे दिया जाएगा लेकिन अब तक उक्त राशि नहीं मिल पाई है. विभाग से संपर्क करने पर कोई जवाब नहीं दिया जाता है. ऐसे में परेशानी बढ़ गई है.

गांव छोड़नें से हो रही परेशानी

पीड़ित बैगाओं ने बताया कि ग्राम थंवरझोल में वर्षों तक निवासरत रहने के बाद नए जगह में आने से परेशानी काफी बढ़ गई है. यहां सुविधाओं का अभाव है मात्र एक नल के भरोसे ही निस्तारी होती है वहीं बच्चों की पढ़ाई लिखाई भी प्रभावित हो रही है. हालांकि वर्तमान में कोरोना वायरस के कारण इस वर्ष स्कूल नहीं खुल पाई है लेकिन अगर आने वाले दिनों में स्कूल खुल जाता है तो बच्चे कहां पढ़ने जाएंगे. थंवरझोल में पानी की सुविधा के साथ साथ निस्तारी के लिए तालाब भी था. लेकिन बीजाढाब में नहीं है. सबसे ज्यादा परेशानी गर्मी के दिनों में होती है.

रोजगार के अभाव में स्थिति दयनीय

बैगाओं ने बताया कि ग्राम बीजाढाब में रोजगार के साधन नहीं है ऐसे में परिवार का भरण पोषण करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. गांव से दूर जाकर जब रोजी मजदूरी करते हैं और पैसा मिलता है तब कहीं जाकर बच्चों का पेट भर पाता है. जिस थंवरझोल गांव से हटाया गया है वहां खेती किसानी का कार्य करने के लिए कृषि जमीन भी थी जिसमें विभिन्न फसलों का उत्पादन कर सालभर तक खा सकते थे लेकिन बीजाढाब में खेती किसानी का कोई साधन नहीं है सिर्फ मजदूरी के भरोसे ही जीवन यापन कर रहे हैं.

वन मंत्री से लगाई गुहार

वन विभाग के द्वारा मुआवजा राशि चार साल गुजर जाने के बाद भी बैगा आदिवासियों को नहीं दिया गया है ऐसे में परेशान पीड़ितों ने गत दिनों वनमंत्री मोहम्मद अकबर के समक्ष न्याय की गुहार लगाई. मंत्री द्वारा आश्वासन देकर पीड़ितों को जिला प्रशासन से मिलने के कहा, जिसके चलते मंगलवार को पीड़ित बैगा कलेक्ट्रेट पहुंचे थे. पीड़ितों की मांग है कि उनके अधिग्रहित जमीन का जल्द ही मुआवजा राशि प्रदान किया जाए ताकि उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके और सुचारू रूप से आजीविका का निर्वाह कर सके.

Updated : 2021-01-06T16:54:45+05:30
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