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खास खबर- बस्तर आर्ट की तर्ज पर कबीरधाम आर्ट ले रहा धीरे-धीरे आकार।

खास खबर- बस्तर आर्ट की तर्ज पर कबीरधाम आर्ट ले रहा धीरे-धीरे आकार।
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0 फर्नीचर से निकले बेकार लकड़ी के टुकड़ों को शहनाज ने दिया रंग रूप।

ताहिर खान

कवर्धा- कोरोना संक्रमण काल में भारत सहित दुनिया के कोने कोने को प्रभावित किया है जिसके चलते सरकार को पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा भी करनी पड़ी थी। इस दौरान लोगों की दिनचर्या बुरी तरह से प्रभावित भी हुआ, लॉकडाउन के दौरान ना जाने कितनी परेशानियों से लोग गुजरे लेकिन वहीं कुछ लोगों ने इस आपदा को अवसर में तब्दील कर दिया। उन्हीं में से एक हैं पूर्व विधायक हमीदुल्लाह खान के पुत्री एवं अधिवक्ता अकबर कुरैशी की पत्नी शहनाज कुरैशी है,जिनके नए मकान में लॉकडाउन के समय घर में फर्नीचर का काम चल रहा था इसी दौरान पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा मार्च में केंद्र सरकार द्वारा की गई, सारी व्यवस्थाएं सहित आम जनता जहां थे वहीं पर रुक सा गए। इस दौरान घर के कोने में बेकार पड़े लकड़ी के टुकड़े को समय काटने के लिए शहनाज कुरैशी ने धीरे धीरे अपने हुनर को रंग रूप देना शुरू किया जो बाद में जिद और जुनून में तब्दील हो गया, साथ ही इन सात-आठ महीनों में बेकार लकड़ी के टुकड़ों ने अलग-अलग वस्तुओं के रूप में बहुत सुंदरता लिए कई अलग-अलग आकार में तब्दील हो गए। शहनाज कुरैशी ने CG संवाद को बताया कि अब तक उनके द्वारा लकड़ी के टुकड़ों से लगभग 100 से अधिक अलग-अलग दैनिक कार्य में काम आने वाले वस्तु जैसे रोटी रखने के लिए पॉट, बेलना, चौकी, ट्रे, कप, फ्लावर पॉट,मोबाइल स्टैंड,खाना खाने की प्लेट,कटोरी,नाश्ता प्लेट,सृंगार बॉक्स,फर्स्ट एड बॉक्स,स्टूल आदि के अलावा बच्चों के तरह-तरह से खिलौने, झोपड़ी, जहाज और तरह-तरह के घर में लगने वाले साज ओ समान अब तक बनाकर उसे एक नए रंग रूप दिया गया है साथ ही ऊपरी हिस्सा में खूबसूरत चित्रकारी की गई है।


व्यपार मेले की शान होती है ऐसी वस्तुएं

शहनाज कुरैशी के द्वारा बनाए गए समान के जैसा वस्तुओं को उस राज्य और जिले के नाम के साथ बड़े-बड़े व्यापार मेला में सामानों की बिक्री बेहद शानो शौकत के साथ तारीफों के पुल बांध कर किया जाता है और जिसकी दाम भी ऊंचे होते हैं और इस और स्टॉल पर इस तरह के सामानों को लेने वालों की भीड़ भी लगी रहती है। शहनाज कुरैशी अपने एक सहायक के साथ लकड़ी को काटती है फिर उसे अलग अलग तराशी गई लकड़ी को जोड़कर नए रंग रूप देने और पेंटिंग करने तक खुद ही सभी कार्य करती हैं, इनके लिए वे लगभग 7 से 8 घंटा प्रतिदिन देते हैं।


महिलाओ को बनाना चाहती है आत्मनिर्भर

शहनाज कुरैशी ने कहा कि महिलाएं घर में खाली ना बैठे हैं और अपने अंदर की छुपी प्रतिभाओं को पहचान कर बाहर लाएं और अलग कार्य करने की कोशिश करें तो हर चीज संभव है, महिलाएं आत्मनिर्भर भारत बनाने में बेहतर भूमिका निभा सकती हैं। अब जो कलाकृति और सामान शहनाज कुरैशी ने बनाए हैं उसे कहीं प्रदर्शनी में लगाने के लिए सोच रही हैं साथ ही शासन-प्रशासन से मांग करते हुए कहा है कि यदि शासन प्रशासन चाहे तो वे दूसरी महिलाओं को भी इसे जोड़कर इस दिशा में बड़ा कार्य करना चाहती है, ताकि कबीरधाम जिले का नाम देश विदेश तक पहुंच सके, साथ ही महिलाएं इससे प्राप्त आमदनी से अपना घर बेहतर ढंग से चलाने में मदद कर सकती हैं।

प्रशासन के प्रयासों पर रहेगी नजर

जिस तरह से छत्तीसगढ़ के बस्तर आर्ट की सराहना देश ही नहीं विदेश में भी होती है उसी तरह अगर प्रशासन इस आर्ट और कलाकृति को बेहतर मंच प्रदान कर प्रमोट करें तो यह ना जाने कितने महिलाओं के लिए आत्मनिर्भर बनने का सहारा बन सकता है साथ ही कबीरधाम जिले का नाम भी गर्व के साथ कला के क्षेत्र में लिया जा सकेगा।

प्रशासन कला को बढ़ाने में करेगा मदद

जिला पंचायत के सीईओ दयाराम ने कहा कि एक-दो दिनों में शहनाज कुरैशी के द्वारा बनाए गए कलाकृति को देखेंगे, साथ ही इसे महिला समूह से जोड़ कर कैसे बड़े स्तर पर इसे ले जाया जा सकता है उस पर हर संभव विचार एवं प्रयास किया जाएगा,जिससे महिलाओं को रोजगार के अलावा जिले का नाम भी रोशन हो पाएगा

Updated : 2020-11-18T20:41:44+05:30
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