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झामसिंह हत्या मामला- मोहम्मद अकबर के पत्र लिखने के बाद भी मध्यप्रदेश सरकार ने दिखाई असंवेदनशीलता, राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उइके से वन मंत्री ने दूरभाष पर चर्चा व पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप का किया निवेदन।

0  मध्य प्रदेश सरकार को कानूनी कार्रवाई  के लिए मोहम्मद अकबर ने लिखे थे दो पत्र ।
0 वन मंत्री को राज्यपाल ने दिया मध्यप्रदेश सरकार से बात करने का आश्वासन।

ताहिर खान
कवर्धा – झलमला थाना के अंतर्गत शीतलपानी के आश्रित ग्राम बालसमुंद निवासी झामसिंह को मध्य प्रदेश की पुलिस ने बेवजह गोली मारकर हत्या कर दिया था। जिसे बाद में नक्सली मुठभेड़ बताने का प्रयास किया गया। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए वन मंत्री मोहम्मद अकबर ने जिला प्रशासन से जांच करने के लिए कहा था, प्रशासनिक टीम मौका मुआयना में जाकर जांच व ग्रामीणों से बातचीत व प्रत्यक्षदर्शी नेम सिंह की निशानदेही करने के पश्चात यह पाया कि मध्य प्रदेश की पुलिस ने छत्तीसगढ़ की सीमा में घुसकर माराडबरा जंगल के भोरटोकरा के कक्ष क्रमांक 158 में गोली मारकर हत्या किया था और साक्ष्य छुपाने के लिए शव को घसीट कर मध्य प्रदेश की सीमा में ले गए थे। इसी मामले को लेकर वन मंत्री ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एवं गृह मंत्री नरोत्तम मिश्र को दोषियों पर कानूनी कार्रवाई और उच्च स्तरीय जांच करने के लिए मांग किया था, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार इस गंभीर संवेदनशील मामले पर कोई ध्यान नहीं दिया और 9 दिन गुजर जाने के बाद भी किसी भी प्रकार से करवाई नही किया। वैन मंत्री ने मुख्यमंत्री शिवराज चौहान को 24 घंटे के अंदर दो पत्र  करवाई करने के लिए लिखे थे, करवाई ना होते देख छत्तीसगढ़ के राज्यपाल अनुसुइया उइके जो कि  मध्य प्रदेश के बालाघाट प्रवास गए थे ,उनसे आज दूरभाष पर चर्चा कर मामले में हस्तक्षेप कर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने का अनुरोध किया। राज्यपाल इस मामले को गंभीरता से लेते हुए वन मंत्री मोहम्मद अकबर को आश्वासन दिया है कि जल्द ही वह मध्यप्रदेश सरकार से संवाद कर उचित कार्रवाई के लिए बात करेंगे ।

मध्य प्रदेश सरकार की संवेदनशीलता

बेकसूर आदिवासी झामसिंह के हत्या मामले में मध्यप्रदेश के शिवराज सरकार ने  असंवेदनशीलता दिखाते हुए इस गंभीर मामले को बेहद हल्के में लिया है। जिससे  आदिवासी बेहद आक्रोशित हैं, सीधे तौर पर मध्य प्रदेश की पुलिस द्वारा हत्या करने के बाद भी शिवराज सरकार एक जांच कमेटी भी गठित नहीं कर पाई।

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