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सरकार बदली, नहीं बदली तो सुपेबेड़ा की तकदीर, किडनी रोग से अब तक 75 लोग गवां चुके हैं जान, फिर गई युवक की जान!

0 कब थमेगा मौतों का सिलसिला, किडनी पीड़ित युवक की हुई मौत।

ताहिर खान
गरियाबंद – फिल्म और कहानियों में आपने किसी गांव को श्राप लगने जैसे कहानी सुनी या देखी होगी। यह हकीकत में होता हुआ दिख रहा है छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में स्थित  सुपेबेड़ा गांव पिछले कई सालों से ऐसे ही किसी श्राप का सामना यहां के रहने वाले ग्रामीण कर रहे हैं। पिछले कुछ सालों में राजनीति का अखाड़ा का केंद्र बने इस गांव में मरने वालों की तादाद कम तो नहीं हुई लेकिन राजनीति जमकर हुई। इस गांव में अब तक किडनी रोग से लगभग 75 ग्रामीण अपनी जान गवा चुके हैं। सरकार और विपक्ष इस गांव को लेकर अपनी राजनीति करते रहे है, कभी कांग्रेस विपक्ष में रहकर इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरती थी, आज सत्ता में पहुंच चुकी कांग्रेस इसी मुद्दे को जो कल तक उनके प्रमुख एजेंडे में शामिल था उसे भूल चुकी है। सुपेबेड़ा में मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। फिर एक किडनी पीड़ित की मौत की खबर है। बताया जा रहा है कि लगभग 3 साल से किडनी की बीमारी से पीड़ित जय सिंह पटेल की बीती रात मौत हो गई। जय सिंह को इलाज के लिए उड़ीसा ले जाया गया था इस दौरान वहां ही मौत हो गई जहां से देर रात सुपेबेड़ा लाया गया और सुबह अंतिम संस्कार किया गया हम आपको बता दें कि गरियाबंद का सुपेबेड़ा वह बदनसीब गांव है जिसे किडनी की बीमारी ने घेर लिया है और एक-एक कर वहां के लोगों की मौत हो रही है जय सिंह से पहले 75 और लोग जान गवा चुके हैं मगर मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।

बुजुर्ग ही नहीं अब कम उम्र के लोग भी किडनी की बीमारी तथा अन्य बीमारी से मरने लगे हैं मृतक जय सिंह की उम्र सिर्फ 45 वर्ष थी व किडनी की बीमारी के साथ-साथ अन्य शुगर बीपी तथा कुछ और बीमारियों से भी पीड़ित था बीते 3 साल से किडनी की बीमारी से जूझ रहा था ग्रामीण बताते हैं कि उसने छत्तीसगढ़ की बजाय उड़ीसा में सारा इलाज कराया किंतु एलोपैथी इलाज से थक चुका था और अब देसी इलाज करा रहा था इसी के चलते उसने डॉक्टरों की दी हुई दवाइयां खाना बंद कर दिया था  इन सब के बीच कुछ दिन पहले जब उसकी तबीयत बिगड़ी तो उसे उड़ीसा ले जाया गया जहां कल रात उसकी मौत हो गई परिजन उसे उड़ीसा से वापस छत्तीसगढ़ लाने के लिए भी गाड़ी की व्यवस्था नहीं कर पा रहे थे जिस पर गांव के त्रिलोचन सोनवानी ने सीएमएचओ से बात कर शव लाने गाड़ी भिजवाई। तब रात 3:00 बजे के करीब शव गांव पहुंचा सुबह मौत की चीख-पुकार के बीच तड़पते परिवार जनों ने अपने घर के मुखिया को अंतिम विदाई दी बता दें कि जय सिंह अपने परिवार का इकलौता किडनी पीड़ित नहीं था,मृतक की मां भी लंबे समय तक कितनी पीड़ित रही थी। जय सिंह का बेटा बताता है कि उसके इलाज में परिवार 5 लाख से अधिक खर्च कर चुका है अब उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है बावजूद इसके वह अपने लिए सहायता नहीं मांगता वह गांव के लिए तेल नदी के पानी की व्यवस्था की मांग सरकार से कर रहा है।
सरकार बदली व्यवस्था जस की तस
क्या भाजपा क्या कांग्रेस सरकारें बदल गई मगर नहीं बदली तो सुपेबेड़ा वासियों की किस्मत एक-एक कर मर रहे सुपेबेड़ा के लोगों को इंतजार है तो तेल नदी के साथ पानी का कांग्रेस जब सत्ता में नहीं थी तो इसे मुद्दा बनाकर बीजेपी को घेरा करती थी खुद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहते हुए सुपेबेड़ा आए थे वही सरकार बनने के बाद पीएचई मंत्री रूद्र गुरु ने हजारों की भीड़ और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव के सामने ही गांव को शुद्ध पेयजल दिलाने तेल नदी से पानी लाने का वादा आज से 2 साल पहले किया था। मगर 2 साल बीत जाने के बाद भी सरकार टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी नहीं कर पाई है। बड़ा सवाल ये कि आखिर कब सुपेबेड़ा में थमेगा मौतों का सिलसिला!

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